"क्या बात है जी ? बड़े खुश हो रहे हो। अखबार वालों ने तुम्हारी तस्वीर छापी है क्या ?"
"अरे पूछो मत लवली। ये देखो अखबार में क्या छपा है। नीतीश सरकार ने बुजुर्गों के रहने के लिए 101 ओल्ड एज होम खोलने का फैसला किया है। अपने 'एरिया' में भी एक ओल्ड एज होम खुलेगा।" विनोद ने अपनी पत्नी लवली को अखबार दिखाया।"
"अरे वाह ! ये तो गजब हो गया। मतलब अब हमें पिताजी यानी उस बुड्ढे से छुटकारा मिल जाएगा।"
"हाँ लवली। हमारी आमदनी अठन्नी है और खर्चा रुपैया। ऊपर से लोन का टेंशन। चलो इससे कुछ तो बोझ हल्का होगा।"
"और नहीं तो क्या। महीने भर से वे 200 रुपये मांग रहें हैं। कहते हैं चश्मे टूट गए हैं, नये बनवाने हैं।"
"अच्छा चलो नाश्ता लगा दो मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है।"
"सुनो! मुझे 500 रुपये देते जाना। बहुत दिनों से ब्यूटी पार्लर नहीं गई हूँ। मेकअप के कुछ सामान भी खत्म हो गए हैं।"
"...अच्छा !"
छत पर धूप सेक रहे किशोरीदास 'बुड्ढा' चुपचाप सब सुनते रहे। कितनी 'मिन्नत-मनौती' करने के बाद उन्हें एकलौता बेटा हुआ था। कितने खुश थे वे और उनका परिवार। घर में हंसी-ठिठौली का माहौल था। पर वो 30 साल पहले की बात है। अपनी पत्नी के तीन महीने पहले गुजर जाने के बाद आज तो रोने को भी कोई उनके साथ न था।

-अमन कुमार, 
सिंघेश्वर-स्थान
2 Responses
  1. Dilbag Virk Says:

    आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14 - 01- 2016 को चर्चा मंच पर <a href="http://charchamanch.blogspot.com/2016/01/2221.html> चर्चा - 2221 </a> में दिया जाएगा
    धन्यवाद


  2. Aman Kumar Says:

    धन्यवाद दिलबाग जी।


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