नोट बंदी की हुई घोषणा
मच गई अफरा-तफरी |
मोदी जी का फैसला सुनकर
भैंसा बन गया बकरी |
बंद हुआ नोट पांच सौ और हजार का  
काले धन पर बरपा कहर सरकार का |

फैसला सुनकर लोग बाग़ दंग हैं  
भारत के आम जन मोदी जी के संग हैं
लोप हुआ असीमित धन के अधिकार का |
बीज खाद खरीदने कतार में किसान है
कुछ लोग नहीं खड़ा पूरा हिंदुस्तान है,
भीड़ में भी भाव है कृतज्ञता और प्यार का |
बंद हुआ नोट पांच सौ और हजार का  
काले धन पर बरपा कहर सरकार का |

काले धन कुबेरों के रंगों में भंग हुआ
पंडित, नेता, सेठ, मौलवी दिवालिया दबंग हुआ |
पूछिए नहीं हाल बैंकों में कतार का,
बंद हुआ नोट पांच सौ और हजार का  
काले धन पर बरपा कहर सरकार का |

मन की बात मोदी राज की बात है ,
अच्छे दिनों की ये अच्छी सौगात है,
बंद किया दाना पानी भ्रष्टाचार का |
बंद हुआ नोट पांच सौ और हजार का  
काले धन पर बरपा कहर सरकार का | 

 

संतोष कुमार सिन्हा
अधिवक्ता, मधेपुरा
उम्मीदों के पंख पसारे,

सफलता की आस में,

गुजरा था एक-एक पल कैसे,  

उम्मीद तेरी चाह में |

कल तू भी छोड़ देगा,

यदि साथ हमारा....

सुबह की नई किरणें,

फिर से देंगी हमें सहारा,

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा |

    
 दीपक यादव

 मधेपुरा, बिहार
डेग-डेग पर झूठ की खेती।
दुष्कर्म के बाद मार दी गई  
कलुआ की बेटी।।
थाना बैठा, पंचायत बैठी।
खूब हुई पैसै की खेती।।
कलुआ भी मजबूर था।
दुष्कर्मी काफी मजबूत था।।
तमाम गवाहों, सबूतों के मद्देनजर  
न्यायालय का आया फैसला।
कलूआ को थी ही नहीं बेटी !
राशन कार्ड, वोटर पहचान पत्र में
नहीं था कलुआ की बेटी का नाम।
ना तो बैंक में था खाता,
ना ही किसी स्कूल के रजिस्टर में  
था उसका नाम।
कलुआ को चेतावनी दी गई,
आगे से झूठा मुकदमा करने पर  
उसके उपर होगा मुकदमा।
कलुआ के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह फैसला व्यवस्था पर सवाल है।।
कलुआ की एक बेटी और जवान है।
वह सोच-सोचकर परेशान है।।


प्रवीण गोविन्द, जर्नलिस्ट
सुपौल
हम भारत माँ के सपूत,
भारत माँ की शान में,
शीश काटते, शीश कटाते,
प्राणों की आहुति दें हम,
भारत माँ की शान बढ़ाते।

हम भारत माँ के सपूत,
हमसा न कोई,
सर्दी हो या गर्मी या हो बरसात,
हथियार थामे,
करते शरहद की रक्षा।

हम भारत माँ के सपूत,
जग में न हमसा वीर,
दुश्मनों का सीना देते चीर।
याद रखेगी कुर्बानी हमारी,
लड़ने की जब बारी आए
सीमा पर हो हर हिन्दुस्तानी ।

हममें है ताकत अकूत
हम भारत माँ के सपूत ।


दीपक यादव
 मधेपुरा, बिहार
मो• 7549494954
इल्म है खूबसूरती
का हमे भी,
तभी तो अक़ीदत से
झुक गये है हम,
तू क्या है सिर्फ़
तुमको नहीं मालूम चाँद
एक यही बात,
फिर से कह गये है हम,
पड़े जो नज़र इनायत की
तेरी मुझपर कभी
एक यही तसव्वुर लिए
हर घड़ी बढ़ रहे है हम
पहुँच ही जायेंगे किसी दिन
तेरी दहलीज तक, जो तू न आई तो,
एक यही आरज़ू लिए अब जी रहे है हम !!
 
अजय ....