अज्ञान के अंधेरों से कहीं दूर
ज्ञान के उजालों में जो खींच लाए
वो होते हमारे गुरु हैं.

इस दुनियां में आने पर,
जो दुनियांदारी की बात सिखाए
वो 'माँ' होती हमारी प्रथम गुरु है.

कठिनाइयों से कभी न डरना,
हौसले से उसका सामना करना,
जीवन का जो सार सिखाए
वो होते हमारे गुरु हैं.

हर मोड़ पर, हर पथ पर,
अच्छे-बुरे का जो फर्क समझाए,
पंख फैलाकर उड़ना सिखाए
वो होते हमारे गुरु हैं.

ईश्वर ने भी यह माना है,
सारे जग ने यह जाना है,
हर पद में जो श्रेष्ठतम,
वो होते हमारे गुरु हैं.

जो दें अपना आशीर्वाद अगर,
तो हर बाधा आसान है.
माँ-बाप की तरह हमपर प्यार जताएं
वो होते हमारे गुरु हैं.

दिल में बस बनाए रखें गुरु
के लिए हम असीम सम्मान.
मिलेगा गुरु का सानिध्य,
बना सकेंगे हम अपना भविष्य महान.



श्रेया वर्मा
मधेपुरा
1 Response
  1. Mahesh Yadav Says:

    बहुत से सुन्दर रचना हैं श्रेया वर्मा जी AchhiBaatein.com


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