चलो फिर अजनबी से शुरूआत करते हैं,
तुम्हें मनाने की मशक्कतें
फिर से आज करते हैं,
नजरों से नजरें बचा,
तेरा फिर से आज दीदार करते हैं,
पल भर की उस एक झलक पर,
फिर से आज जां निसार करते हैं,
चलो फिर अजनबी से शुरूआत करते हैं।

फेसबुक और व्हाट्सअप के जमाने में
चलो फिर से चिट्ठे पुर्जों की बात करते हैं,
मोटर बाइकों की इस भीड़ में,
उसी पुरानी साइकिल पर चलो
फिर से हम आज चलते हैं,
वीडियो कॉल्स तो आम सी बात हो गई,
पर चलो फिर आज हम
रूहों से बात करते हैं,
चलो फिर अजनबी से शुरूआत करते हैं ।

इस दफा हो सके तो हां कह देना तुम,
इस अजनबी में हो सके तो
अपना कल देख लेना तुम,
जो ना हो तो वो भी, कह जरूर देना तुम,
चुपके से ही सही, पर तुम्हें याद हम करेंगे,
पल पल तुम्हें पाने की, फरियाद हम करेंगे,
इस दफा न मिले तो क्या ,
कल फिर अजनबी से शुरूआत हम करेंगे ,
तुम्हें मनाने की मशक्कतें फिर हम करेंगे 
पर चलो अजनबी से शुरूआत करते हैं ।


गुंजन गोस्वामी
सिंहेश्वर, मधेपुरा
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