क्या गुजरी होगी उस माँ पर
जब उसने अपने लाल की शहादत
की खबर पाई होगी।

रुक-रुक कर ना जाने कितनी बार
उस माँ की आँखों में आंसू आए होंगे।

याद आ रहा होगा उस माँ को
जब उसने अपने लाल की ऊँगली
पकड़ चलना सिखाया होगा।

क्या गुजरी होगी उस पिता पर
जिसने अपने दिल का
टुकड़ा खोया होगा।

क्या गुजरी होगी उस पिता पर
जिसने अपने बेटे की चिता को
आग लगाया होगा।

सोचकर सहम जाती होगी
वो बहन जिसने अपने भाई के साथ
रक्षाबंधन का पावन त्योहार मनाया होगा।

कैसे रहेगा वो भाई जिसने
दुनिया को परखने की कला
अपने भाई को सिखाया होगा।

अधूरा रह जाएगा वो दोस्त
जिसने हर सही, गलत रास्ते पर
उसका साथ निभाया होगा।

न जाने क्या गुजरी होगी उस माँ पर
जब उसने अपने लाल की
शहादत की खबर पाई होगी।

 

अमन झा, समस्तीपुर
मो०-7070560701
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