डेग-डेग पर झूठ की खेती।
दुष्कर्म के बाद मार दी गई  
कलुआ की बेटी।।
थाना बैठा, पंचायत बैठी।
खूब हुई पैसै की खेती।।
कलुआ भी मजबूर था।
दुष्कर्मी काफी मजबूत था।।
तमाम गवाहों, सबूतों के मद्देनजर  
न्यायालय का आया फैसला।
कलूआ को थी ही नहीं बेटी !
राशन कार्ड, वोटर पहचान पत्र में
नहीं था कलुआ की बेटी का नाम।
ना तो बैंक में था खाता,
ना ही किसी स्कूल के रजिस्टर में  
था उसका नाम।
कलुआ को चेतावनी दी गई,
आगे से झूठा मुकदमा करने पर  
उसके उपर होगा मुकदमा।
कलुआ के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह फैसला व्यवस्था पर सवाल है।।
कलुआ की एक बेटी और जवान है।
वह सोच-सोचकर परेशान है।।


प्रवीण गोविन्द, जर्नलिस्ट
सुपौल
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