इंजीनियरिंग कॉलेज के वो यादगार लम्हें
आज भी कर देते हैं अंतरमन को प्रफुल्लित
‘मीता’ के लॉज में बराबर जमती
मौज-मस्ती भरी यारों की महफ़िल
उसके एक छरहरे-सजग घनिष्ट मित्र का
बातचीत का अपनत्व भरा लहजा
आर्थिक और सामजिक विषयों पर छेड़ी चर्चा
खींच लेता सभी जमावडों का ध्यान
कॉलेज कैंटीन के अन्दर भी खाली वक्त काटते
चाय-कॉफ़ी का आनंद उठाते
हो जाते शांत-गंभीर
सुन उस उत्साही की बदलाव भरी मुहिम
उसके उद्भासित सशक्त विचार
कर देता हममें नव चेतना का संचार
प्रथम वर्ष में ही मीता के संग
उस आत्मज के लॉज में पहुँचने पर
उसके टेबुल पर संजोयी दिखती
लोहिया की किताबें और ‘दिनमान’
अन्दर बाहर से था वह एक जैसा
पहली बार मिला देखने को
सभी साथियों की जमात लिए
पटना के लाला लाजपत राय भवन में
बिन दहेज़ के की थी उसने बड़ी सादगी से शादी
वह आदर्श विवाह था हम सब के लिए एक मिसाल
उसके सामने लड़कों द्वारा पेश हर तरह के मसलों को
खुले दिल से सुलझाने का करता वह भरसक प्रयास
उन्हीं चितेरे अंदाज और जुझारूपन को देख
इंसानियत की मुहर लगा दी थी सब ने
उसकी विश्वसनीयता और निष्पक्ष पकड़ पर
उसी खासियत भरी पुष्पलता ने
हर घर-छप्पर पर फ़ैल-पसर
आज बना दिया है उस नीतीश को
समाज के हर वय-वर्ग का संरक्षक
सबका दुलारा
सबका चहेता |



नरेंद्र यादव
  मधेपुरा
1 Response
  1. Unknown Says:

    Nighain nighaion se mila kar to dekho
    Naye logon se rishta bana kr to dekho...

    Hasratain dil me dabane se kya faida

    Apne honth hila kr to dekho.

    Dil se dil ki bat bata kr to dekho. Bata kr to dekho....


टिप्पणी पोस्ट करें