एक कहानी है इस मन में
घूम रही कब से चितवन में
आज तुम्हें सुनाता हूँ
सोने की चिड़िया कहते थे जिसको
उस देश की बात बताता हूँ
जिस चिड़िया को सब ने लूटा
जाने कितने सालों में
उड़ती थी जो हवा में खुलकर
फस गयी थी अब जालों में
इस चिड़िया का नाम है भारत
जिसने दुनिया को ज्ञान दिया
हर आने वाले अतिथि को इसने
सेवा और सम्मान दिया
प्रण करते हम भारतवासी
वो वक़्त आज दोहराएंगे
ये देश थी सोने की चिड़िया
सोने का बाज़ बनाएंगे।

देश बंधा है ज़ंजीरों से
हर बेड़ी तोड़ हटा दें हम
बल हो हर सपूत का इसमें
मेहनत न पड़ जाये कम
उठें चलें फिर दौड़ लगाएं
इस देश को आज बचाना है
लक्ष्य देख कर बढ़ते जाएं
हमें सबसे आगे जाना है
खुशियाँ हों सब के हिस्से में
हम राम राज्य दोहराएंगे
ये देश थी सोने की चिड़िया
सोने का बाज़ बनाएंगे।
 
- साकेत भारतीय
   रांची 

0 Responses

टिप्पणी पोस्ट करें