ये हवा
सूरज, चाँद, सितारे
बारिश की बूँदें !

गिरफ़्त में नहीं तुम्हारे !
खड़े तो कर लिए हैं तुमने
बड़ी इमारतें, ओहदे, शोहरतें
न देखते, न ही सोचते-विचारते -
स्वाँस के आवागमन का
एक ही है रास्ता,
उसके न्याय का सबसे है वास्ता !

ख़रीद नहीं सकते तुम
उसकी क़ायनात,
वरना क्षमा मांगते उस रात !
उसके बंदगी में हो तो
उसकी बख्शी ज़िंदगियों से
न करो खेल !

न्याय कभी न कभी तो
बदलेगा करवट
हो सकती है
तुम्हारी भी साँसों को जेल !!


डॉ. भावना तिवारी 
9935318378

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