ए अभिमानी...
न कर तू अभिमान रे इतना
न कर तू अभिमान.

पल भर में वो टूट जायेंगे
न वो किसी के काम आएंगे
पैसों पर जो किया है तूने
कल वो किसी और के होंगे
लक्ष्मी की तू कदर कर इतना
कल होगी ये और किसी की
भले आज है तेरा अपना.
न कर तू अभिमान रे इतना.

न कर नफरत छोटों से तू
सभी खुदा के एक ही बंदे
न आएगा अभिमान काम में
जब जाओगे एक कफ़न ओढ़कर
टूट जाएगा तेरा सपना
न कर तू अभिमान रे इतना.

कुछ ऐसा कर गुजर जहाँ से
याद रखे इतिहास तुझे भी
उतरो खरे इरादे पर तू
कर उपयोग जीवन का इतना
जीवन का कर मान तू इतना.

न कर तू अभिमान रे इतना
न कर तू अभिमान.



ब्यूटी यादव
मधेपुरा
0 Responses

टिप्पणी पोस्ट करें