हर रोज़ कुछ सिखाती,
तो कभी नई उलझने है बनाती ,
ये ज़िन्दगी तो है ज़िन्दगी,
जो साथ मुस्कुराती.

कभी पहेली है बुझाती,
तो कभी अन्दर ही अन्दर रुलाती,
ये ज़िन्दगी है ज़िन्दगी,
जो हर दिन कुछ नया सुनाती
                                            
कहने को तो चंद साँसों की डोर है,
पर ज़िन्दगी का इससे भी आगे एक शोर है ,
कभी ये तुम्हे साथ ले जाएगी ,
और एक दिन साथ भी छोड़ जाएगी
ये ज़िन्दगी है ज़िन्दगी,
ना जाने कब रूठ जायेगी

कद्र करो हर एक लम्हे का,
जो साथ है उसके पास होने का,
अपने हर लम्हे में मुस्कुराना सीखो,
जो लाये किसी के जीवन में खुशियाँ,
कुछ ऐसा कर दिखाना सीखो
                          
कीमती पल को यूँ नहीं है बर्बाद करना,
जीवन के अच्छे मूल्यों का,
हमसब को है पहचान करना ,
जीत जाओ तो ना कभी घमंड करना,
और हार जाने पर न कभी शर्म करना.

हर पल को जियो यही तो ज़िन्दगी है कहती,
सीख जाओ उस पल से कुछ बातें सही,
तो लगने लगेगी फिर से ये ज़िन्दगी नयी.

अभिषेक सिन्हा
भागलपुर
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