तुम मेरे साथ मंदिर चलो
मैं तेरे साथ मस्जिद
चलता हूँ.

तुम पूजा करो
और मैं नमाज पढ़ता हूँ.

तोड़ दो ये धर्म की दीवारे
क्योंकि
उपरवाला एक है
और एक ही
बात कहता हैं.

मजहब सिखाता है
प्यार करना
इंसा को इंसा से
नफ़रत हैवानियत हैं.

सच कहता हूँ
ये बात अभी मान लो
मेरे साथ मंदिर चलो
और मुझे मस्जिद ले चलो



राकेश सिंह (मधेपुरा, बिहार, इंडिया )

0 Responses

टिप्पणी पोस्ट करें