सुनो री  सखी !

हम चाहे दूर रहें या पास ,

कभी कम न हो दोस्ती की ये मिठास ,

जो महकती रहे जीवन भर ,

बन फूलों की मधुर सु-वास ,

भावनाओं में कविता बन ढले,

और हृदय में हो मिलने की आस ,

 मित्रता दिवस की हार्दिक शत शत बधाइयाँ ---


पद्मा मिश्रा
(LIG 114, रो हॉउस, आदित्यपुर-2, जमशेदपुर-13)


0 Responses

टिप्पणी पोस्ट करें