टिमटिमाते दीये से पूछे
महंगाई का हाल.

मुस्कुराके वो होले से बोल उठा
मेरी  तरह हर इन्सान त्रस्त है.

मै तो इश्वर का माध्यम हूँ
मेरी बदोलत ही इन्सान.

इश्वर से जीवन मे कठिनाइयों
को दूर करने की चाह रखता है.

तो क्यों मांग लू इश्वर से
महंगाई दूर करने का वरदान.

मै तो एक छोटा सा दीया हूँ
जो देता आया हूँ हर घर मे.

विश्वास और आस्था का हौंसला
किन्तु मुझे भी डर है भ्रष्टता चारियों की.

आँधियों से जो मुझे बुझा ना दे
सच्चाइयो के हाथो की आड़ लेकर.

ढँक लो जरा मुझे
अगर बुझ गया तो इन्सान कभी.

महंगाई कम होने का वरदान
मांग ना सकेगा इश्वर से.


संजय वर्मा "दर्ष्टि "
125,शहीद भगत सिंह मार्ग
मनावर (धार )

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