कुछ याद आ रहा है
कान बँद कर लो
वरना
वरना शहीदों की चीख
तुम्हे बहरे बना देगें

सो जाओ पड़ोस के
हल्ले गुल्ले से डरने वाले
कायरों घर में छुपकर
टी वी का भोल्युम तेज कर लो

ज्यादा गुस्सा आए तो
घर में बीबी है बच्चे हैं
बुढे माँ बाप तो होगे ही
थोड़ा चीख लेना
मगर अभी कान बंद कर लो

वोट देने के अधिकार तक
सीमित रहने वालों बाहर निकलो
कफन बाँध लो जुर्म के खिलाफ

तेरी एक आवाज देश को तो नहीँ
मगर तुम्हें बदल देगे और
तेरा बदलना ही शंखनाद होगा

एक क्राँति जो तबाह कर सकती है
तबाहीयों का सिलसिला
लम्बे लम्बे भाषणों से
अंकित होने वाले इतिहास से
अच्छा है कि खुद का इतिहास लिख जाओ

जो भले पन्ने में ना छपे
मगर जिस दिल में छपेगें
वहाँ क्राँति होगी
वन्दे मातरम . . . . . .


शम्भू साधारण

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