तुम्हारा आना
खूब बातें करना
भाता हैं अब मुझे.

तुम्हारी साँसों से
शायद चलती हैं अब
जिंदगी मेरी .

तुम्हारे ना आने से
मानो थम जाती हैं
सांसे मेरी .

पता नहीं तुम हो कौन ?
क्या लगती हो मेरी ?
मैं समझ ना पाया
अब तक...

तुम हो कौन ?
क्या करूं, क्या कहूँ ?

तुम  ही बता दो अब
इस रिश्ते को
मैं क्या नाम दूँ?


राकेश सिंह, (मधेपुरा, बिहार, इंडिया)
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