नया जोश हो, नई उमंग हो
गीत प्यार के गाओ तुम,
नफरत की दीवार मिटा दो
सबको गले लगाओ तुम ।

धनी-गरीब का भेद मिटा दो
जाति-पाँति की दीवार गिरा दो,
धर्म जहॉं सबको जोड़ता हो
ऐसा दीप जलाओ तुम ।

शिक्षा जहाँ सबको नसीब हो
रोटी की कोई चिंता न हो,
छत जहाँ हर सिर ढकता हो
ऐसा विश्व बनाओ तुम ।

नारी जहाँ नर पर भारी हो
दहेज दानवों के लिए काली हो,
कंधा से कंधा मिलाती हो
ऐसा बिगुल बजाओ तुम ।

बच्चे जहाँ फुटपाथी न हो
हाथ जोड़ भीख न मांगते हो,
सभ्य मानवों से शोषित न हो
ऐसा कदम उठाओ तुम ।

नव वर्ष की नव बेला में
गीत खुशी के गाओ तुम,
हर दिल में प्रेम-बीज बो दो
सबको गले लगाओ तुम ।

 


कृष्ण ठाकुर
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