हरदम रहे मौसम यहाँ,  
समृद्धि और हर्ष का ।
पैगाम है ये दोस्तों 
मेरी ओर से नववर्ष का ।
हो जिन्दगी आसन अब,  
सबको मिले मुस्कान अब,
चाहत मेरी है खत्म हो,  
दौर अब संघर्ष का......।
पैगाम है ये दोस्तों 
मेरी ओर से नववर्ष का ।

मिलकर हमे है रोकना,  
अपने वतन का ये पतन,
मिलकर करेंगे हम शुरू,  
कार्य अब उत्कर्ष का ।
पैगाम है ये दोस्तों 
मेरी ओर से नववर्ष का ।

पिछड़े हुए हैं हम तो क्या,  
हैं रास्ते मुश्किल तो क्या,
तय कर लेंगे हम सफ़र
फर्श से लेकर अर्श का
पैगाम है ये दोस्तों  
मेरी ओर से नववर्ष का



रचना भारतीय,
 मधेपुरा




(ग्रामीण विकास पदाधिकारी, सहरसा में पदस्थापित)
3 Responses
  1. Unknown Says:

    Milkar hame rokna hai watan ka patan....kya khub kaha aapne..Its really heart touching because I love my country.....


  2. Unknown Says:

    Milkar hame rokna hai watan ka patan....kya khub kaha aapne..Its really heart touching because I love my country.....


  3. Aman Kumar Says:

    रचना जी, आपके पैगाम को "सलाम". . .


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