आग सी तपती है बेटियाँ ,
काटों का दुख झेलती है बेटियाँ ,
फिर भी बलात्कारियों के हाथो
मारी जाती है बेटियाँ ,

जनम से मृत्यु तक सहती है बेटियाँ ,
चाहे जन्म ले रही हो या जन्म दे रही हो ,
फिर भी मारी जाती है बेटियाँ ,
मैंने क्या गुनाह किया
इस दुनिया में आकर ,
क्यों प्यार नहीं मिला मुझे
इस दुनिया में रहकर ,

तीन बरस में किया पिता ने बलात्कार ,
तेरह बरस में भाई की नजर ख़राब ,
बेटियों का है यही हाल,
अधिकतर घर वालों में घर वालें ही बलात्कार,
कौन है मेरा पिता, भाई या पति ,
सबने किया मेरे इज्जत से खिलवाड़,

क्या यही है मेरी जिंदगी का हाल,
कभी नहीं माँगा तुमसे कुछ,
क्यूँ किया मेरी इज्जत से खिलवाड़,
बलात्कारी घूम रहे है आजाद ,
कल होगा अब अगला बलात्कार ,
तमाशा देखने को सभी लोग है बेक़रार

जिस पर बीती उसी को पता है उसका हाल,
बलात्कारियों को होगी कब सजा,
जब होगा हर बेटी का
नहीं..................
हर बेटी को जन्म देने होगी लक्ष्मीबाई.


गीता गाबा,
नई दिल्ली
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