पैरों की जगह पहियों का
इस्तेमाल करते हो
और कविता, किताबों,
क्रांति की बातें करते हो?
पागल हो क्या?

कितनी बार कहा है ये कच्चे शब्द,
ये भोंथरे विचार कुछ नहीं बचेंगे
सिर्फ पैसा ही शाश्वत होता है
बाकी सब ख़त्म हो जाता है
अरे जब अपने ही फटकारेंगे
तब ये कुछ काम नहीं आएंगे

चौपायों की तरह चलते हो
और ख्यालों के काले आसमान में
प्रेम के गुलाबी सितारे टांकते हो?
याद रखो जो चौपाये बेकार होते है
वो सिर्फ कटने के काम आते है
उनसे रिश्ते नहीं बनाये जाते
अगर तुम लेब्राडोर या पग होते
तो भी शायद कुछ हो सकता था

इतनी सी बात तुम्हे
क्यों नहीं समझ आती
प्रेम सिर्फ प्रेम नहीं होता
और भी बहुत कुछ होता है
कभी रेबेन के चश्मे की तरह
एलीट बनाता है
तो कभी करिज्मा की तरह
बगल में दमकता है.



संजीव शर्मा, आगरा
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