इतिहास भूलकर अपना,
हमने खुद को भुला दिया ।
वीरों के बलिदान का ,
ये कैसा सिला दिया 

सिन्धु की ये सभ्यता ,
दुनिया में अनोखी थी ।
अदभुत अशोक था और
विरल चाणक्य की नीति थी ।
उस यश कीर्ति को हमने
मिट्टी में मिला दिया 
वीरों के..................।

याद करो कि दुनियाँ ने
भारत को गुरु माना   
और हमारे बुद्ध को भी,
अपना ईश्वर जाना   
जगा के इस दुनियाँ को,
हमने खुद को सुला दिया ।
वीरों के................।

गाँधी ने वतन की खातिर,
जो स्वप्न सजाया था   
सौहार्द्र, प्रेम, नैतिकता  का,
जो बाग लगाया था     
अपने स्वार्थ में हमने  
वो गुलशन जला दिया ।
वीरों के .............।

वक़्त अब भी है कि,
हम उत्थान करें फिर से ।
एक अनोखे भारत का,
निर्माण करें फिर से 
वापस फिर लाएं वो वैभव,
जो हमने है मिटा दिया ।
वीरों के...............।



रचना भारतीय, 
मधेपुरा.
1 Response
  1. Prabhawkari rachna. Badhai is tarah ki samvedirashtri bhawnaon ki abhivyakti ke liye...


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