हवाओं की बेरुखी मे....
साफ मौजूद वियतनाम की चीखें...!!

घर-घरो के वारीस....
शमशान छेकाए बैठे....!!

ऊपर चीलम फूकता चीन...
बारूद-बोझल ऊंगता पड़ोसी का खेत...!!

इजराएल की सूखी रेत...
कितनो का खून निचोड़ेगी....!!

दुनियावालो का गुलाबी मांस...
कब तक खाएँगे ये बारूदी गिद्ध....!!




मिश्रा राहुल
(गोरखपुर)
1 Response

टिप्पणी पोस्ट करें