वक्त तु गुन्हेगार हैं मेरा,
जरा थम, तु तो सरपट दौड चला,
इस दौड का पुराना खिलाडी हैं तु,
मेरे पहले भी कितनो को पीछे छोड चला,
छलिया, बहरुपिया, बाजीगर है तु,
दे-दे चुनौतिया,
खुद बाजी मार जाता है तु,
वक्त जरा थम, तु गुन्हेगार है मेरा,
तु तो सरपट दौड चला,

सुबह की भोली, नन्ही किरण सा नजर आया था मुझे,
तु एक छोटा सा पल है, यह जताया था मुझे,
दौड के लिये उकसाया था मुझे,
यह बराबरी की दौड हैं,
यह छलावा दिया था तुने मुझे,
आज मुझे थमना पडा,
और तु सरपट दौड चला,
वक्त जरा थम,तु गुन्हेगार है मेरा,

जरा थम कि,पुराना हिसाब-किताब कर ले,
तेरे गुनाहो की फ़ेहरिस्त कर ले,
अपने गिरेबाँ में जरा तु झाक तो ले,
मेरे अपनो के साथ तुने जो छल किया,
उसका भी हिसाब कर ले,
गुजरे वक्त में जो गुजर गये,
उन्हे भी याद कर ले,
जरा थम, तु तो सरपट दौड चला,
वक्त तु गुन्हेगार है मेरा,


मैने वक्त के साथ, वक्त की बाजी खेली,
सोची थी तुझे पीछे छोड,
आगे निकल जाउँगी,
मैं कैसी नादान थी,
तुझे अपना समझ बैठी,
आज जाना वक्त किसी का सगा नही होता,
कभी इसे तो कभी उसे है छलता,
भँवर में फ़ँसा हर इंसान को,
खुद सरपट दौड जाता हैं
वक्त जरा थम ,
तु गुन्हेगार है मेरा,

जाना कि कभी-कभी,
धीमी दौड की बाजी खेलता हैं तु,
लम्हा-लम्हा,पल-पल सरकता है तु,
अह्सास दिलाता है मानो थम गया है तु,
और अपने प्रतिदंव्दी को झांसा देकर,
फ़िर बाजी मार ले जाता है तु,
तुझसा कोई शातिर खिलाडी नहीं
यह जताकर,सरपट दौड जाता है तु,
वक्त जरा थम, तु गुन्हेगार है मेरा,

हर कोई सोचता है कि,
वक्त उसका अपना है,
नहीं जानता कि भ्रम मे जीता है वह,
क्या कहुँ, कि
हर दिल की फ़टी चादर में,
वक्त के पैबंद नजर आते है,
आज तुझसे रुबरु हुँ मैं,वक्त
आ कि तेरी गुस्ताखियाँ गिना दुँ,
जरा थम, तु तो सरपट दौड चला,
वक्त, तु गुन्हेगार है मेरा,

उंगलियो पर गिन लु,
बस इतना ही वक्त है बाकी,
और तुझे फ़िसल कर निकल भागने की है जल्दी,
मेरे पास चंद पल,
तेरे पास सदियो का वक्त है,
आ आज आमने-सामने बात कर ले,
कितना कुछ रह गया है,बिन अंजाम के,
जरा हम गुफ़्तगु कर ले,
वक्त जरा थम, तु तो सरपट दौड चला,
वक्त तु गुन्हेगार है मेरा,

दोस्त बन साथ चलता है तु,
देता है उँचा दँभ,
फ़िर करता है दगा,
और गिराता है धरातल पर तु,
जार-जार रुलाता है तु,
सब समझे दुनिया मालिक चलाता हैं,
पर मैं कहु,
यह बेरहम वक्त है,
जो यह खेल खिलाता हैं
आ कि, आज तुझसे मैं निपट लु,
वक्त जरा थम, तु तो सरपट दौड चला,
वक्त तु गुन्हेगार है मेरा......



निशा मोटघरे
औरंगाबाद, महाराष्ट्र
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