मेरे मालिक !
आपको कौन सी सज़ा पसंद है …?
जिससे चाहेंगे खेलना
गुन गुनायेंगे
सज़ासज़ा.. वो सज़ा
ज़रा हमको
सज़ा दो
साज़
तो सज़ा दो
चिंता मत कीजिये
आपको फांसी की सज़ा नहीं होगी
क्योंकि
आपका अपराध रेयरेस्ट आफ़ रेयर नहीं है
आपको
गिरफ्तार भी नहीं किया जायेगा
होगी रक्षा आपके बुनियादी अधिकारों की
जेल में भी नहीं रखे जायेंगे
दूतावास है न
अपना अतिथि गृह
हम निर्दोषों को सज़ा देने में
माहिर हैं तो क्या हुआ ?
टोपी और दाढ़ी
देखकर मान लेते हैं आतंकवादी तो क्या हुआ …?
शक  की बुनियाद पर भेजते हैं
मौत का परवाना तो क्या हुआ …?
सोनी सोरी की गुप्तांगों में
कंकड़ डालने वाले पुलिस अधिकारी
बहादुरी के सम्मान से नवाज़ते हैं तो क्या हुआ …?
भंवरी देवी को तो आप जानते ही होंगे
जानते होंगे
हरियाणा के मीरपुर की दास्ताँ
क्यों चिंता करते हैं…?
मछुआरों की
आप नहीं मारे होते
उन्हें
कोई कैटरिना, सुनामी मार देती
मत भूलिए !
हम इंडिया हैं
दुनिया के मानचित्र पर अनोखा
सबसे बड़ा लोकतंत्र
इतना तो उदारवादी होने का फ़र्ज़ निभाएंगे

  
डॉ रमेश यादव, 
सहायक प्रोफ़ेसर, इग्नू 
नई दिल्ली 
1 Response
  1. सत्य घटनाओं पर आधारित बहुत करार व्यंग्य, शैली बहुत प्यारी लगी मुझे और भाव तो इतने उबाल सा अ गया इस नालायकियत पर.


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