जब-जब मेरे जीवन पथ पर,
जन्म दिवस है आता
मेरी शेष बची आयु में,
एक वर्ष घट जाता
शेष के कम होने पर भी,
खुशी मनाते लोग
बात समझ में आये नहीं,
पर खाते सुन्दर भोग
अर्थ समझना चाहो जो तुम,
अर्थ है सीधा साधा
चिन्ता का ये विषय समझ लो,
बची न आयु ज्यादा
अपने शेष कार्य निबटाने,
में जल्दी दिखलाओ
कम बची अब आयु तुम्हारी,
जीवन में गति लाओ
खुशी मनाना चाहो जो तुम,
 बचा एक ही पक्ष
जिस उद्देश्य की खातिर आये,
निकट को आता लक्ष (आख़री मंजिल)




कवि आदेश अग्रवाल प्रकाश
ऋषिकेश, उत्तराखण्ड
मो0-09259964898
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