अंजू
 सुनो सखि !
हम भूत से सीखकर, भविष्य रचते हैं
मूर्ख थी सूर्पनखा, नाम ग्राम बता दिया
सच बोल के नाक कान कटा लिया
हम तो इसीलिए पहचान बचा के रखते हैं
सब कुछ छिपा के रखते हैं
हम भूत से सीखकर, भविष्य रचते हैं.
जानते हैं इस रेखा को, उस रेखा को
और लक्षमण रेखा को भी;
इसलिए कोई रेखा खिंची नहीं हमने
न खींचने दी आवास में अपने
चाहो तो जी भर के देख लो
दरवाजे तो हैं यहाँ, पर चौखट नहीं रखते हैं
हम भूत से सीखकर, भविष्य रचते हैं
 यह चौखट हमें रोकता है, बार-बार टोकता है
चौखट की चाहत थी बन जाने की सीमा रेखा
समय रहते पहचान लिया, तत्काल निर्णय ले लिया
बोलो! सारा घर तो छानमारा, कहीं कोई चौखट दिखा?
हम कोई चौखट नहीं रखते हैं
हम भूत से सीखकर, भविष्य रचते हैं.

  संजू
तूने कह ली अपने मन की,
 अब मेरी भी तो सुन!
नाहक डरती है लक्ष्मण रेखा से तू!
अब जब लक्ष्मण ही नहीं
तो लक्षमण रेखा कैसी?
आज का लक्षमण
सूर्पनखा का नाक-कान नहीं काटता,
उसके तलवे चाटता है,
वह उसे जीवन-संगिनी भले न बना सके,
बन के ब्वायफ्रेंड दंडक का ही नहीं
लंकापुरी का भी ऐश्वर्य भोगता है.
लेकिन एक खतरा है इसमें  
बहना मेरी! जरा सोचो इस तरह
उर्मिला का घर तो फिर भी बस गया,
बसना ही था क्योकि चौखट था
इसलिए लक्ष्मण लौट गया,
अपना लक्ष्मण यदि लंकापुरी गया 
तो क्या होगा?
क्या इस चौखट की आवशयकता नहीं आज भी?
इस चौखट से आखिर क्यों भाग रहीं हम-आप?
इस चौखट के भीतर सुरक्षित तो हैं
लक्ष्मण रेखा से पूरीतरह संरक्षित तो हैं
क्योकि, न पार किया होता सीता ने रेखा,
तो देनी न पड़ती उन्हें अग्नि परीक्षा
यह परिक्षा भी आखिर किसी काम न आई
संदेह के भूत ने उनकी चौखट छुड़ाई
मिला सहारा उन्हें जिस तपोवन में
था चौखट वहां भी, जप और तप का
इस चौखट ने ही उनकी मर्यादा बचाई
सूत के पाँव चौखट के अन्दर तक आई.
आई स्वयं भी वो चौखट के अन्दर
लेकिन वो भूत, रह रह कर उभरता
उबकर सीता फिर धरती में समाई
कोई पुरुष भी नहीं लाँघ सकता यह चौखट
यदि चौखट किसी लक्ष्मण ने बनाई
यदि हारा है पराक्रम, रावण का भी इससे
तो समझो वह चौखट बना होगा किससे
सेवा की शक्ति और ब्रह्मचर्य बल से
निष्ठां की चाप से निर्मित था वह चौखट
सुधारना होगा स्वयम को, सुधारना भी होगा
है चौखट जरूरी, उसे रखना ही होगा
था कल भी जरूरी, है वह आज भी जरूरी
होगा कल भी जरूरी, यह कहना ही होगा,
हाँ रखना ही होगा, उसे रखना ही होगा.


डॉ. जयप्रकाश तिवारी
लखनऊ
1 Response
  1. आभार इस रचना को स्थान देने के लिए. सम्बंधित चित्रों से सजाकर आपने इसे और भी अर्थवान बना दिया.


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