जिंदगी कट गई तुम खफा ही रहे
हम तुम्हारे लिए बेवफा ही रहे.

साथ जीने की, मरने की सोची मगर
हम जहर हो गए, तुम दवा ही रहे.

बाद मरने के बाद भी हाथ हैं यों उठे
जो न पूरी हुई, तुम दुआ ही रहे.

तुमने लिखी खुशी या दिए गम मगर
तुम हमारे लिए बस खुदा ही रहे.




डॉ शान्ति यादव
प्राचार्या,
एसएनपीएम हाई स्कूल, मधेपुरा.

3 Responses


  1. जनता सोयी हुई नहीं जागी है, 'चेतन' इस बार
    अब की बार आप देखना बदलेगी साथी, तस्वीर

    प्रोफ़. चेतन प्रकाश 'चेतन'


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