होली का त्योहार है ऐसा, जिसमें बरसे रंग
चाहे जितनी गुजिया खालो, चाहे पी लो भंग

आपस में सब गले मिलें, भूल के सारी जंग
इस त्योहार की ये है खूबी, खुल जांए दिल तंग

पकड़ छोड़ अब भागे करूणा, कांग्रेस की चोली
बोले मैड़म नही खेलनी, तेरे संग अब होली

करूणानिधी को देख मुलायम, कड़क हो गये ऐसे
बेनी बन गये बलि का बकरा, बोले इतना कैसे

सत्ता का अब नशा फिसलता, होने लगी है जंग
होली का त्योहार है ऐसा, जिसमें बरसे रंग



कवि  आदेश अग्रवाल 'प्रकाश'
ऋषिकेश (उत्तराखंड)
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