सारे सुन्दर रिश्ते-नाते बेमानी हो गये
रक्त-सम्बन्ध पिघल कर पानी हो गये
गुरु-शिष्य/भाई-बहन का पावन प्रेम प्रदूषित
गुरुजी शिष्या लेकर चंपत/फानी हो गये
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पिता-पुत्र में जंग मची है-नाजायज
श्रवण-श्रीराम की पितृ-भक्ति कहानी हो गये
पति-पत्नी की अलग-अलग राहें/विवाहेतर
सत्यवान-सावित्री/सती-शिव भी बेपानी हो गये
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माता का खून हुआ स्वयं सपूतों के हाथों
जननी जन्मभूमिश्च.../अब लंतरानी हो गये
मर्यादाएं टूटी/नई पीढ़ी कार-बंगला-पैकेज में जुटी
देश-प्रेम/देश-भक्ति अब कल्पित बानी हो गये
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अमर शहीदों के सपने टूटे/सुख-चैन लुटे
नेह-निष्ठा-ईमान/भक्ति-भाव नादानी हो गये...


 -डॉ० रामलखन सिंह यादव
 अपर जिला जज प्रथम,मधेपुरा.


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