प्यार हुआ इकरार हुआ ... 
दूरदर्शन के इस ऐड को देखते हुए खोता कि इससे पहले बिजली देवी अपनी सौतन वाली रौब दिखाते हुए गुल हो गई,
एक धत्त की अफ़सोस भरी मुख ध्वनि के साथ
मैं मन मसोस कर आकाशवाणी चालू कर दिया..
"आकाशवाणी का दिल्ली ए इन्द्रप्रस्थ 816 मेगा हर्ट्ज़ पे आल इंडिया रेडिओ पे मौसम की जानकारी अनिरुद्ध पाठक से सुन रहे है" .. चालू होते ही 
दोपहर के 2 बजने वाले है, आकाश बादलों से घिरा हुआ है, तेज़ बारिश की संभावनाएं बनी हुई है 
इस सूचना के साथ दोपहर की मौसम के जानकारी का ये अंश समाप्त हुआ ... आगे पुराने गीतों की माला रसमंज़री कार्यक्रम को सुने .. ओर तभी आसमान में जोरों  का शोर हुआ जैसे मेघ पूरा का पूरा टूट कर मेरे छत पे आ गिरा हो .. मैं बिस्तर पे लेटा  लेटा अपने कमरे की खिड़की से झांकते हुए मानो ये तसल्ली लेना चाहा की बाहर सब ठीक है .. तसल्ली तो मिली पर भींगते नज़रों के साथ क्यूंकि इतने में बारिश शुरू हो चुकी थी ...  
ओर फिर रेडिओ पे ..ये गाना बजने लगा ..
"तुमको देखा तो ये ख्याल आया" ..
फिर क्या था बारिश की भींगी ठंडी सी एहसास ओर उसमे ये रोमांटिक गीत मुझे चादर को अपने शारीर  पे फैलाते हुए दूर किसी यादों में ले गया ... जहाँ  मैं तेज़ कदमो के साथ आफिस के लिए बस स्टैंड की ओर बढ़ा जा रहा था कि इतने में मेरे कदमो को विराम देने के लिए एक आवाज़ पीछे से आई ..
"भाई साहब जरा रुकना" ..
ये आवाज़ कानो पे पड़ते ही कदम किसी चुम्बक के भांति जमीन से चिपक गए हो ओर में खुद को जैसे तैसे उस दिशा में मौड़ते हुय झल्लाहट भरे शब्दों से में पूछा ... क्या है ?
सामने वाला व्यक्ति  .. अरे भैया माचिश होगा क्या ..?
ये सुनते ही मनो मेरे तन बदन में आग लग गई हो .. फिर भी खुद को सँभालते हुए  बोला हाँ है.
सामने वाला व्यक्ति  .. तो दो ना बीड़ी जलानी है 
मुझे तो दिल किया की उस बीड़ी के साथ खुद को भी जला लेना  .. ये कहते हुए माचिश  दू .. पर में आराम से ही बोला लो ..
सामने वाला व्यक्ति  .. माचिश लेते हुए लज्जा ओर आदर भरे शब्दों से पूछा आप भी लो ना बीड़ी
मैंने ..शुक्रिया अदा  कहते हुए बोला ..जी में नहीं पीता हूँ ..
सामने वाला व्यक्ति  .. हैरत  के साथ पूछा  .... फिर माचिश  क्यूँ रखते हो 
मुझे बहुत गुस्सा आया  .. ओर गुस्से में बोला ..

"में सिगरेट/बीड़ी  नहीं पिता हूँ, फिर भी माचिश रखता हूँ, वो इस लिए की, ना जाने किस वक़्त ज़िंदगी के किस मोड़ पे मुझे इसके एक तीली से दुनिया को फूंकने का मौका मिल जाये"  
  
मेरा ये जवाब मानो किसी लौरी  के नीचे धकेलने के बराबर सा उस व्यक्ति को महसूस हुआ .. ये उसके चेहरे के अजीबो गरीब भाव से मुझको पता चला ...फिर उसी तेज़ कदमो से बस स्टैंड की ओर चल पड़ा जिस तेज़ कदमो पे में रुका था .. 
बस स्टैंड ...
रोज लेट से पहुँचने की आदत मानो आज समय से पहले स्टैंड पे पहुंचा दिया हो, वो भी इस तरह जिसका कोई वर्णन नहीं किया जा सकता .. सुबह के 7 बजे का वक़्त बड़ा ही खुशगवार सा मौसम और सामने मुनरिका के बस स्टैंड पे 724 नम्बर के बस का पहले से इंतजार करती एक बेहद ही खुबसूरत ओर कर्ली वालों वाली लड़की जो लाल ओर हरी ड्रेस में किसी मादक मृगिनी से कम नहीं लग रही थी .. जैसे लगा उसको देखकर .. आज का दिन मेरा अच्छा हो गया हो  .. मुझे बरसों से जिस लड़की की तलाश थी वो मानो मिल गई हो, ओर वो यही हो  ... ओर न जाने ऐसे कितने ख्वाब एक साथ दिल की ज़मी पे उभर सा गया उस वक़्त उसे देखते ही  ..
यहाँ पे मैंने एक बार फिर खुद को संभाला ओर जा के उसके बाजु में खुद को खड़ा कर दिया  .. 
लड़की ... अपने कर्ली बालों के एक लट को सँभालते हुए मोहक मुस्कराहट से मुझको एक नज़र देखा ..जैसे मेरे वहां होने का स्वागत किया हो  ..
उसका इस तरह का स्वागत देख कर मुझसे रहा नहीं गया .. 
में खुद को जैसे रोक नहीं पाया ... मेरे होठ अनायस से कुछ गुनगुनाने लगे .. तुमको देखा तो ये ख्याल आया
और तो और मैं खुद को "तुमको देखा तो ख्याल आया" गीत के फारूख शेख ओर वो उस लड़की को दीप्ति  नवलसाथ साथ फिल्म से समझ बैठा  !
ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी लड़की को देखकर मैं यूँ खोया कि गुनगुनाहट की आवाज़ होठों के सहारे बहार तक फैलने लगी  ...
 "तुमको देखा तो ये ख्याल आया"
पता नहीं मैं उसके सम्मोहन में कितनी देर रहा ..
पर जब सम्मोहन टुटा तो बस आ के दूर निकल गई थी ओर वो लड़की भी .. 
फिर क्या था ..वही लम्बी सी धत्त ओर अफ़सोस की नज़र बस के पीछे पीछे कुछ दूर तक दौड़ता रहा  ओर मायूस होके खाली हाथ लौट आया .. फिर से दूसरी बस के आने का इंतजार करने ओर  भागती दुनिया के भीड़ में खुद को खोने के लिए ..
पर आज भी जब कभी भी ये गीत मेरे कानो में पड़ती है,  तो वो ठंडी एहसास ओर कर्ली बालों की वो खुबसूरत लड़की का चेहरा मेरे जेहन ओर मन मस्तिक को अपने यादों से तरो ताज़ा सा कर देती है  ..
उफ़ वो सुबह ओर वो बस स्टॉप ... ओर वो लड़की .. अपने चादर से चेहरे को निकलते हुए बोला रेडिओ के गीत के समाप्ति पर !!

(एक काल्पनिक कहानी जो मेरे दिमाग की एक छोटी सी उपज है जिसे में आप लोगों से शेयर कर रहा हूँ .. अपनी टिप्पणी ज़रूर दें ताकि आगे मैं और लिख सकूं .. !!)

--अजय ठाकुर, नई दिल्ली.
7 Responses
  1. bahut hi khubsurat ehsaso me lipti rachna .. badhayi ho ..ummid hai age bhi is tarah ki rachna padhne ko milegi .. subhkamnaye in advance :)


  2. Sukriya Sunita Agrawal G will get my next story very soon ..kindly touch with this page .. :)


  3. सच में सम्मोहन के असर बहुत असरदार होता है। आजकल इसी सम्मोहन से बंधे ना जाने कितने युवा की करियर उस बस की तरह छुट जाती है। ----- एक बहुत ही खुबसूरत सा काल्पनिक ख्याल को बहुत ही सुसज्जित ढंग के सब्दों सेपिरोया हैं। पाठकों के मन में जैसे बिजली कौंधने के बाद कुछ देर दिखाई नहीं देती वैसी ही सस्पेंस बनी रहती है। अच्छी रचना के लिए धन्यवाद।


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