नारी तू नारी है !
सृष्टि की रचना है.
तुझसे ही तो ये जग है,
जग से ही तो संसार है.
तू शक्ति है, तू धरती है,
तू विद्या है तू भक्ति है.
नारी तू नारी है !

तू जगतारिणी है, तू दुःखहरनी है,
अम्बेरूप और कालीस्वरूप है.
तू दयारूप, सती और सहनशक्ति की देवी है.
तू अबला नहीं सबला है.
नारी तू नारी है !

फिर क्यूं अबला बन बैठती है ?
ये कलियुग है,
इस युग में तेरी जरूरत है.
बलात्कार, अत्याचार, जुर्म, दहेज
की आग में जल रही है.
देख रही है अपनी दशा,
फिर क्यों इस दुर्दशा पर खामोश है ?
नारी तू नारी है !

जाग, जाग, जाग ऐ नारी,
विनाश कर फिर से महिसासुरों का,
शांति, सदभाव, सदाचार, सदबुद्धि
भर दे फिर से जग में
नारी तू नारी है !!!!

- श्रुति भारती (लवली आनंद) 
  मधुबनी, कुमारखंड (मधेपुरा)
1 Response
  1. नारी के अस्तित्व का बखान करती सुन्दर रचना.


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