एक दिन कहीं वो मुझे मिला
किसी अनजान सड़कों पर
अजनबी ना था पर अपना भी नहीं
उसने कहा तुम मेरी चाहत हो
तेरा प्यार मेरी जरूरत है
तेरा चेहरा मेरा आईना
तेरे जज्बात मेरा मुकद्दर
भावना तेरी मेरा स्वाभिमान है
अश्क तेरी बदनसीबी है मेरी
कोई देखे तुझे तो जल जाऊं मैं
पाकर तुझे आसमां तक उड़ना है मुझे
साथ लेकर सफर में चलना है तुझे.....
      *****
ये उनका फैसला था, थी उनकी तमन्ना
उनकी चाहत उनका ख्याल था
मुझे पता था एक दिन
सब भूल जायेंगे वो
कसमे-वादे क्या है
ये पूछ जायेंगे वो
हसरतें क्या है मेरी
टाल जायेंगे वो..
रोते हुए मझधार में
छोड़ जायेंगे वो
कौन है तू
ये सवाल कर जायेंगे वो
फिर से अनजान बनकर भूल जायेंगे वो
अनजान सड़कों पे छोड़ जायेंगे वो
      *****
संयोग था आज नजरें मिली मेरी उनसे
मैं अकेली थी, पर...
उनकी चाहत दूसरी थी
तमन्ना भी दूसरी
जिंदगी के सफर में हमसफ़र भी
दूसरी.....


-श्रुति भारती लवली 
 मधेपुरा.
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