हमरा मोन पडैत ऐछ अपन घर
जे एकटा मंदिर छल
सरस्वतीक वास सन
लक्ष्मी क हास सन
मंगलमय वरदान सन ..............
दिसा दिसा सँ मधुर रागिनी अवैत छल
सरगम क ध्वनि गवैत छल
प्रेम प्रीति स भरल
जीवन क गीत स साजल
ओ हमर घर छल.
पावैन तिहार क रंग स
जितिया पावैन बड भारी--उगाह चान कि
लपकों पुआ क नाद स ;अपन आनक
उलहन-उल्लास स
भंगक तरंग सन छल ओ जीवन .....
आय विस्थापित जकां एहि महानगर में
भटकि रहल छी....
अपन आन लेल तरसि रहल छी ...
सौनसे शहर देवार स पाटल ऐछ
रहवाला क्यों नही
उजहिया जकां लोग भागि रहल ऐछ
लालसा लिप्साक व्यामोह में
नहि जानि कथीक छोह में
घर मात्र शरण लेवाक स्थान भ गेल
एकटा अल्प विराम बनि गेल..नहि हास नै
विलास एते , नै उन्मुक्त जीवनक आस एते
घरबनैत अछ प्यार स दुलारस
हंसी स मजाक स , मुदा,
ईंट, पाथर, सीमेंट घरे नै मानवक ह्रदय पर
प्लास्टर चढ़ा गेल
प्यार ,ममता, आदर सब भाव प्लास्टर क
नीचा दबा गेल
हमर घर कते हेरा गेल.........................



-डॉ० शेफालिका वर्मा
0 Responses

टिप्पणी पोस्ट करें