कोई शिकवा या गिला न रहा
उनसे मिलने का सिलसिला न रहा।

अब तो नाम भर से रह गई रग्बत
उनकी यादों का काफ़िला न रहा।

किससे रूठें या मनायें किसको
जबकि दिल का ही मामला न रहा।

मिलके खूने -जिगर से सींचा था
कमनसीबी, कि घोंसला न रहा।

यों तो बिखरे हैं आज भी तिनके
फिर से चुनने का हौसला न रहा।



-डॉ० शान्ति यादव, मधेपुरा
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