उम्मीदों के पंख पसारे,

सफलता की आस में,

गुजरा था एक-एक पल कैसे,  

उम्मीद तेरी चाह में |

कल तू भी छोड़ देगा,

यदि साथ हमारा....

सुबह की नई किरणें,

फिर से देंगी हमें सहारा,

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा |

    
 दीपक यादव

 मधेपुरा, बिहार
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