महँग भेल
धान गहूँम
दलहन आ तेलहन
सबटा महँग भेल
दिन दुगुन
तें राति चौगुन।
ईंधन महँग
पानि महँग
नव-नव कंपनीक
दवाई महँग
डाक्टरक फीस
आ ईलाज महँग
आ सब सँ
अधिक जे
भेल महँग,
ओ थिक
अपन लोक
जे हाकिम बनि
गाम आ
परिवार सँ
कोसो दूर
शहर मे
बसल छथि
हुनकर
दर्शन महँग
हुनक विचार
आ व्यवहार महँग।
सस्ता भेल
जा रहल अछि
सोना आ चानी
मोटर गाड़ीक
डीजल आ पेट्रोल
संगहि
सौन्दर्यक प्रसाधन।
अहीं ठा
मोन पड़ैत अछि
पुरना ई फकरा
जे~~~~~~
"पेट में खर नञि
आ सींग में तेल।"



स्वाती शाकम्भरी
सहरसा
1 Response
  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, १२२ साल पहले शिकागो मे हुई थी भारत की जयजयकार , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !


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