एक अधूरे ख्वाब की,
पूरी रात है.....मेरे पास...
तुम हो ना हो,
तुम्हे जीने का एहसास है.....मेरे पास.....!

तुम्हे छोड़ कर जाना हो तो जाओ,          
अभी उम्मीद छोड़ी नही है मैंने...
तुम्हारा इन्तजार करुँगी,
मुझे थामने के लिये....
तुम्हारा विश्वास है.....मेरे पास.....!!

मैं बढ़ रही हूँ,
कदम-दर-कदम मंजिल की तरफ...
मुझे तन्हा न समझना तुम कभी,
हर कदम तुम्हारा साथ है......मेरे साथ....!!!

गुजरे हुए लम्हों की बाते लेकर,
तुम्हारे ख्यालो में गुजरी राते लेकर....
अपने सिरहाने लेकर लेटी हूँ.....
मुझे नींद के आगोश में ले जाती,
तुम्हारी यादे है......मेरे पास.......!!!!

जिन्दगी के उलझे सवालो में,
कितनी बार टूट कर बिखरी हूँ....
अपने ही सवालो से........
फिर समेटा है खुद को,
मेरे सवालो के दिए....
तुम्हारे वो जवाब है......मेरे पास......!!!!!

इस भागती जिन्दगी में,
सब छुटा जा रहा है..
तुम से दूर हुए दिन हफ्तों में,
हफ्ते महीनो में,महीने साल में.....
बदलते जा रहे है......
इस बदलते वक़्त के साथ,
तुम्हारे साथ बीते लम्हात है.....मेरे साथ.....!!!!!!!

एक अधूरे ख्वाब की,                                   
पूरी रात है.....मेरे पास...
तुम हो ना हो,
तुम्हे जीने का एहसास है.....मेरे पास.....!


सुषमा 'आहुति'
कानपुर.
1 Response
  1. Sunil Kumar Says:

    Very nice poem Sushma Ji,It has touched my heart.Thank you very much.


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