अभी आगाज है ये बस,अभी अंजाम बांकी है।
अभी तो नापी है धरती,अभी आसमान बांकी है।

अभी तो पास हुए हैं बस, किताबों की परीक्षा में
अभी फर्ज और कर्तव्य का इम्तिहान बांकी है।

अपनी मिट्टी को अभी जरा सा मान दिया मैंने
फलक पर चमके इसका नाम, वो काम बांकी है।

हमारी जिन्दगी के दिन न कम करना मेरे मौला
वतन के वास्ते अभी कितने अरमान बांकी हैं।

नेकी की राहों में हमारा हर कदम होगा....कि....
जब तक दिल में है धड़कन, जब तक जान बांकी है।



रचना भारतीय, 
मधेपुरा




(रचना भारतीय का चयन बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में 'ग्रामीण विकास पदाधिकारी' के पद पर हुआ है. पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: हौसलों की उड़ान ने दिलाई रचना को बीपीएससी में सफलता)
2 Responses
  1. RAJESH KUMAR Says:

    सब से अच्छा.....



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