रहे बेहोश ये दुनिया मगर तुम होश न खोना ।
मेरा कहना है तुमसे ए कलम खामोश न होना ।
जो तू चाहे तो तख्त-ओ-ताज की,
बुनयाद हिला दे........।
जुर्म से, अन्याय से..........
हर पर्दा हटा दे..........।
इसलिए सत्ता का तू बनना न खिलौना 
मेरा कहना है तुमसे ए कलम खामोश न होना ।
कुम्भकर्णी नींद में ..........
जो लोग सोए हैं .........।
जो भूलकर इंसानियत .....
खुद में ही खोए हैं ........।
जगाना है उन्हें इसलिए ,तुम नही सोना ।
मेरा कहना है तुमसे ए कलम खामोश न होना ।
हर तरफ फैला.........
ये जो नफरत का आलम है ।
बैचैन...बेबस...बेजार.....
लाचार मौसम है........।
माहौल में ऐसे तुझे बस प्यार है बोना ।
मेरा कहना है तुमसे ए कलम खामोश न होना ।



रचना भारतीय, मधेपुरा
3 Responses
  1. sushma verma Says:



    बहुत ही प्यारी और भावो को संजोये रचना......


  2. pallavi Says:

    Bahut hi achhi kavita hai, dil ko chhu lene wali....


  3. manish Says:

    In realy it is very usable poem for those people who is selfish!!! hope you will bring change...


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