कुछ न कुछ रोज 
नयी बात हो जाती है,  
कभी खूबसूरत तो कभी 
वाहयात हो जाती है.

मौसम का भी अंदाज़ 
कमोवेश यही है, 
कभी चिलचिलाती धूप 
कभी बरसात हो जाती है. 

मेरी खामी पे ही उनकी नज़र 
हर वक़्त टिकती है,
खूबियाँ मेरी उनके वास्ते 
खुराफात हो जाती है.

चाहता हूँ बच के चलना 
और झटक कर निकलना,
फिर भी उन्हीं से रोज 
मुलाकात हो जाती है....


                                                     
शम्भू शरण भारतीय 
मधेपुरा
1 Response
  1. jyoti khare Says:

    waah bahut sunder rachna

    आपको और आपके परिवार को
    होली की रंग भरी शुभकामनायें

    aagrah hai mere blog main bhi sammlit hon


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