(उन सैनिकों को समर्पित जो..
चाह कर भी घर नहीं जा पायेंगे)
जब से हूँ मैं तेरी होली,
खेली न तूने संग मेरे होली।
तड़प रही स्पर्श को तेरे,
बीत गये कई सावन मेरे ।।
हर होली पर बाट मैं देखूँ,
थाली में हूँ रंग सजाए ।
एक उम्मीद बनी है अब भी,
न जाने वो कब आ जाए।।
नहीं दूर तुमसे मेरी प्यारी,
क्यों बैठी हो लेकर थाली ।
सीमा की है जिम्मेदारी,
इसीलिए नहीं आया प्यारी ।।
तुमसे बड़ा है फर्ज देश का, 
अच्छी लगेगी उस दिन होली।
दुश्मन के सीने में जिस दिन,
उतर जायगी एक-एक गोली।।



कवि आदेश अग्रवाल प्रकाश
ऋषिकेश (उत्तराखंड)
2 Responses
  1. jyoti khare Says:

    sarthak marmik anubhuti

    आपको और आपके परिवार को
    होली की रंग भरी शुभकामनायें

    aagrah hai mere blog main bhi sammlit hon
    aabhar



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