भीगते मौसम की कराहटें
जैसे जिस्म की खाल में
कोई रेशमी बूंटे टाँग रहा हो
तेज़ाब में सुईयाँ डुबा डुबाकर
देख ना कितनी खूबसूरत
कशीदाकारी हुई है
रोम- रोम पर पड़े फफोलों पर
तेरा नाम ही उभर कर आया है
अब कौन चीरे उन फोड़ों को
जिन पर महबूब का नाम उभरा हो
जीने का मज़ा तो अब आएगा
जब टीस में भी तेरा अक्स नज़र आएगा
मैंने मांग ली है दुआ रब से
ओ खुदा अब ना करना मुझे मेरे यार से जुदा
मोहब्बत में मिलन कैसे भी हुआ करे
बस यार का दीदार हुआ करे
देख ना मेरी मोहब्बत की इन्तेहाँ
सोचती हूँ ..............उन फफोलों पर
तेरे साथ अपना भी नाम अंकित कर दूं
एक बार फिर तेज़ाब में सुइयां डुबाकर
क्या हुआ जो एक बार फिर से
दर्द की बारादरियों से गुजरना पड़ेगा
तेरे नाम के साथ मेरा नाम तो जुड़ जाएगा
और दुनिया कहेगी
तेरे नाम पे शुरू तेरे नाम पे ख़त्म
जिसकी कहानी हुयी
ओ राँझेया ............देख वे
तेरी हीर दीवानी होयी !!!


- वंदना गुप्ता, नई दिल्ली.
1 Response
  1. सोचती हूँ ..............उन फफोलों पर
    तेरे साथ अपना भी नाम अंकित कर दूं
    एक बार फिर तेज़ाब में सुइयां डुबाकर
    क्या हुआ जो एक बार फिर से
    दर्द की बारादरियों से गुजरना पड़ेगा
    तेरे नाम के साथ मेरा नाम तो जुड़ जाएगा ............वाह वंदना जी ..बहुत खूब अभिव्यक्ति ...बधाई


एक टिप्पणी भेजें